व्रत - 1 Sonali Rawat द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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व्रत - 1

साल में 2 बार नवरात्रे आते हैं. उन दिनों में अनिल की शामत आ जाती. घर में खेती कर दी जाती और सब्जीतरकारी में प्याज का इस्तेमाल बंद हो जाता. वहीं, जरा सी ही कोई प्यार की बात की तो उसे माता रानी के कोप से डराया जाता. अनिल के दिल में यह अरमान ही रहा कि कभी उस की पत्नी उसे प्यार करने के लिए उत्साहित करे. उस ने हमेशा अनिल का तिरस्कार ही किया. अनिल कपड़े पहन कर दफ्तर जाने के लिए तैयार हो चुका था. दूसरे कमरे में उस की पत्नी वर्षा गीता का पाठ करने में मग्न थी. वह दिल ही दिल में खीझ रहा था कि उसे दफ्तर को देर हो रही है और वर्षा पाठ करने में लगी हुई है. सत्ता में नरेंद्र मोदी का फरमान लागू है, समय पर दफ्तर पहुंचने के कड़े आदेश हैं, किंतु वर्षा है कि उसे कुछ परवा ही नहीं. खाना बनने की प्रतीक्षा करूं तो देर हो जाएगी और अधिकारियों की झाड़ सुननी पड़ेगी, भूखा ही जाना होगा आज भी. उस ने एक्टिवा पर कपड़ा मारा और बाहर निकाल कर खड़ी कर दी.

वापस कमरे में आ कर बोला, ‘‘मैं आज भी भूखा ही दफ्तर चला जाऊं या कुछ खाने को मिलेगा?’’

वर्षा ने कोई उत्तर न दिया और पाठ करती रही. अनिल ने थोड़ी देर और प्रतीक्षा की, फिर बड़बड़ाता हुआ एक्टिवा उठा कर भूखा ही दफ्तर चला गया. अनिल के लिए यह नई बात नहीं थी. उस की पत्नी रोज ही सुबह नहाधो कर पूजा करने बैठ जाती और वह नाश्ते के लिए चिल्लाता रहता, किंतु उस पर कोई असर न होता. उस की शादी को 8 साल हो चुके थे, किंतु अभी तक उन के यहां कोई संतान नहीं हुई थी.

पहले वह अपने मातापिता के साथ रहता था. वर्षा सुबह उठ कर पूजापाठ में लग जाती और उस की मां उसे खाना बना कर दे दिया करती थी. कुछ समय बाद उसे सरकारी फ्लैट मिल गया और वह अपनी पत्नी को ले कर फ्लैट में चला आया था. यहां आ कर उसे नई समस्या का सामना करना पड़ रहा था. अनिल को अकसर रोज भूखे ही दफ्तर जाना पड़ता था क्योंकि वर्षा पूजापाठ में लगी रहती थी, खाना कौन बनाता? उस ने कई बार उस से कहा भी था, किंतु वह कब मानने वाली थी. वह तो अपना धर्मकर्म छोड़ने को बिलकुल तैयार न थी. अनिल का विचार था कि इंसान को भगवान की आराधना नहीं, अपनी रोजीरोटी की चिंता करनी चाहिए.


वह वर्षा के रोजरोज के व्रत से भी बहुत परेशान था. आज क्या है? आज पूर्णमासी का व्रत है. आज सोमवती अमावस्या का व्रत है. आज मंगल का व्रत है. यह कहना शायद गलत न होगा कि रोज ही कोई न कोई व्रत होता था और वर्षा उसे अवश्य रखा करती थी. अनिल की उम्र 22 साल की थी और वर्षा की 20 साल. जवानी की उम्र थी, अनिल के दिल में अरमान थे, कुछ उमंगें थीं. वह अपनी पत्नी से प्यार करना चाहता था, किंतु जब भी वह उस से प्यार जताता या उसे छू भर देता तो वर्षा कहती, ‘मुझे हाथ मत लगाओ, जी, मैं आज अमुक व्रत में हूं. मुझे तो पाप लगेगा ही, तुम को भी पाप का भागीदार बनना पड़ेगा,’ बेचारा अनिल दिल मसोस कर रह जाता.